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Sunday, October 11, 2009

होनहार बिरवान के होत चीकने पात

इस कहावत पर प्रेमचंद जी ने एक साहित्यिक नाटक लिखा है। इस कहावत का अर्थ है कि जो होनहार (प्रतिभाशाली) लोग होते हैं, उनके ढंग और गुण ही निराले होते हैं। वह मामूली लोगों से अपनी सोच के बल से अलग दिखते हैं।
(बिरवान = पेड़, पात = पत्ते)

यहाँ पढिये... प्रेमचंद का जीवन परिचय (सारांश)
एवं हिन्दी के अन्य कवि और लेखक